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Showing posts with the label कटाक्ष/ Satire

अंकलजी बने शहंशाह

जब लड़कियों को सिगरेट पीते देख अंकलजी का खून खौला, तब उन्होंने तय किया कि उन्हें ही अब कुछ करना होगा। “ शहंशाह ” बनना होगा।     एक बुजुर्ग अंकल हैं। उन्हें कई दिनों से बड़ा गुस्सा आ रहा था। समाज में फैली बुराइयाँ उन्हें एंग्री ओल्ड मैन बना रही थीं। अपने इलाके के एक कैफे के बाहर खड़े होकर सिगरेट पीने वाली लड़कियाँ तो उन्हें खासतौर पर कुपित कर रही थीं। बस, अंकल ने सोच लिया कि बुराई को खत्म करने के लिए अपने को ही कुछ करना होगा। यूँ देश-समाज में ढेरों बुराईयाँ व्याप्त हैं मगर अंकलजी की नज़रों में शायद सबसे ज्वलंत बुराई यही है कि लड़कियाँ सिगरेट पीकर बिगड़ रही हैं। वैसे उन लड़कियों के साथ लड़के भी कैफे के बाहर खड़े होकर सिगरेट पीते थे लेकिन उनकी बात और है। आफ्टर ऑल, बॉइज़ विल बी बॉइज़। खैर, अंकलजी ने तय किया कि उन्हें ही समाज को सुधारने के लिए निकलना होगा। अपने ज़माने में अंकलजी फिल्मों के बड़े शौकीन रहे हैं। और अपने ज़माने के अधिकांश सिने प्रेमियों की ही तरह बिग बी के ज़बर्दस्त फैन भी रहे हैं, जिन्हें तब बिग बी नहीं बल्कि एंग्री यंग मैन कहा जाता था। तो जब लड़कियों को सि...

चौपट राजा अमर भये

“ मगर यदि सबको दिन में सोकर रात्रि में काम करना है, तो बिना दीयों के वे कुछ देख कैसे पाएंगे, महाराज ?” शाही वज़ीर ने चिंतित भाव से प्रश्न किया। “ उन्हें कुछ देखने की आवश्यकता ही क्या है ?” चौपट राजा बोल पड़े। “ हम हैं न, हम ही लोगों को बताएंगे कि क्या है और क्या नहीं। प्रजा वही देखेगी, जो हम उसे दिखाएंगे। इससे हमें भी शासन करने में सुविधा होगी और प्रजा का मन भी इधर-उधर राष्ट्र विरोधी बातों में नहीं भटकेगा। ”     चौपट राजा ने मंत्रिमंडल की विशेष बैठक बुलाई थी। सारे मंत्री दरबार में एकत्र हो चुके थे। तभी महाराज ने अपने चिर-परिचित ठस्के के साथ प्रवेश किया। मंत्री भी अपने चिर-परिचित अंदाज़ में जयकारा लगाने लगे, “ चौपट राजा की… जय !” “ … जय !” “ … जय !” इतना सुनत े ही अपने सिंहासन की ओर बढ़ रहे चौपट महाराज पल भर को रुक गए और अपने परम प्रिय शाही वज़ीर की ओर उन्मुख होकर बोले, “ इससे याद आया ! तुम्हारा सुपुत्र कैसा है ? खेल-खेल में राजकाज के तौर-तरीके सीख रहा है कि नहीं ?” महाराज के मुखारविंद से अपने सपूत का उल्लेख सुन शाही वज़ीर की आँखें चमचमा उठीं और वे बोल पड़े, ...

चौपट राजा के दरबार में देशद्रोहियों की पेशी

“ अक्षम्य ! ऐसा राष्ट्रद्रोह किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसे कठोर कारावास दिया जाए। ” चौपट राजा क्रोध में तमतमा रहा था।   चौपट राजा ने रोज की तरह सधे कदमों से दरबार में प्रवेश किया। रोज की तरह शाही वज़ीर ने द्वार पर ही उनका स्वागत किया। रोज ही की तरह राजकाज की कार्रवाई राष्ट्रद्रोह के आरोप में गिरफ्तार नागरिकों की पेशी से शुरू हुई। चौपट राजा ने सिंहासन ग्रहण करते हुए अभियुक्तों पर एक निगाह डाली और बोल पड़े, “ आज तो कई सारे गद्दार पकड़ लाए हो वज़ीर !” “ क्या करें महाराज, ” शाही वज़ीर बोला, “ लगता है राष्ट्रद्रोह अब किसी महामारी की भाँति फैलता जा रहा है। ” “ खैर, कार्रवाई शुरू की जाए ” , महाराज का आदेश हुआ। शाही वज़ीर ने पहला आरोपी पेश किया। “ महाराज, यह आदमी कल लोगों से यह कहते हुए देखा गया कि पता नहीं विकास कहाँ है, अब तो लगता है कि वह कभी नहीं आएगा। एक तो आपके द्वारा किया जा रहा चौतरफा विकास इसे दिखता नहीं, ऊपर से अनर्गल बोलकर दूसरों को भी आपके व देश के खिलाफ भड़का रहा था। ” “ मगर मैं तो अपने बेटे विकास के बारे में बोल रहा था ! वह साल भर पहले घर से चला ...